मखाना की खेती से जुड़ी समस्त जानकारी: उत्पादन, संग्रह, बाज़ार , बिक्री और मुनाफा

मखाना की खेती
मखाना की खेती

आपने अक्सर अपने घरों में मखाने (Makhana ) की खीर खायी होगी |या कभी मखाने की नमकीन जो की घी से तर होती है |पर क्या आप जानते है कि इतना स्वादिष्ट मखाना आखिर आता कहा से हैं? आखिर कौन लोग हैं जो इसकी खेती करते होंगे |और आखिर कैसे होती होगी इसकी खेती? यदि आप भी मेरी ही तरह मखाने को खाना बेहद पसंद करते है तो यह लेख खास आपके लिए ही हैं | आज हम जानते हैं मखाना की खेती (Makhana ki Kheti) से जुडी कुछ महतवपूर्ण बातें|

मखाने से जुड़े कुछ रोचक तथ्य:

हमारे यहाँ “मिथिला की शादी” में एक रस्म होती है, जिसे ‘कोजगरा’ कहते हैं| इस में मखाने से बने पकवानों का इस्तेमाल होता ही है। इस में बड़ी मात्रा में मखाने का इस्तेमाल होता है |इन्हें जरूरतों एवं स्वाद के वजह से आज मखाने ने चाहने वालों का एक बहुत बड़ा मार्किट तैयार किया है| आइये जानते है मखाने से जुड़े कुछ रोचक तथ्य,

  • भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर के कुछ सुदूर इलाको में मखाने के जड़ और पत्तो के डंठलो की सब्जी बनाई जाती है |
  • 28 फ़रवरी 2002 को दरभंगा के निकट बासुदेवपुर में राष्ट्रीय मखाना शोध केंद्र की स्थापना की गयी। दरभंगा में स्थित यह अनुसंधान केंद्र भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कार्य करता है।
  • छोटे छोटे कांटे की बहुलता के वजह से मखानो को कांटे युक्त लिली भी कहा जाता है|
  • मखाना के निर्यात से देश को प्रतिवर्ष 22 से 25 करोड़ की विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। व्यापारी मखाना दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भेजते हैं।
  • मखाने को उगाने के लिए खाद या कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं करना परता जिसके वजह से इसे आर्गेनिक भोजन भी कहा जाता है |

स्वाद के साथ सेहत भी:

बहुत कम ही ऐसी चीजे होते है जो स्वाद के साथ-साथ आपकी सेहत का भी ध्यान रखे| ऐसे में मखाना आपके लिए एक वरदान साबित हो सकती है| आइये जानते है मखाने में पाए जाने वाले कुछ पौष्टिक तत्वों के बारे में|

मिलने वाले तत्त्व एक नजर में-

तत्व   मात्रा (मखाने में)
प्रोटीन 9.7%
कार्बोहाईड्रेट 76%
नमी 12.8%
वसा 0.1%
खनिज लवण 0.5%
फॉस्फोरस 0.9%
लौह पदार्थ 1.4 मि०ग्राम

मखाने खाने से होने वाले फायदे –

  • दिल की देखभाल – शोध कर्ताओं का कहना है कि मखाना खाने से हार्ट-अटैक जैसे गंभीर बीमारियों से हम बच सकते हैं|
  • जोड़ों के दर्द में लाभकारी – मखाने में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होती है| इसको रोजाना खाने से गठिया एवं जोड़ों के रोग से छुटकारा पाया जा सकता है |
  • पाचन में मददगार – इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट होती है जिससे इसे आसानी से पचाया जा सकता है |
  • किडनी के लिए लाभकारी – इसका सेवन स्प्लीन को डीटोक्सिफई करता है| इसे रोजाना खाने से किडनी को बहुत लाभ मिलता है |
  • प्रेगनेंसी के दौरान – प्रेगनेंसी के दौरान मखाने का सेवन रोजाना करने से लाभ मिलता है| जानकारों की माने तो मखाना पाचन में सहायक होती है| प्रेगनेंसी के दौरान शरीर को पौष्टिक आहार की जरुरत होती है जिस कारण यह बहुत लाभकारी है | इसे आप प्रेग्नेंसी के बाद भी खा सकते हैं| मखाने को हमेसा से एक अच्छे रिकवरी एजेंट के रूप में देखा जाता रहा है |

कहाँ होती है मखाने की खेती-

वैसे तो पूरे भारत के कुल उत्पादन का 85% सिर्फ बिहार में ही होता है | परन्तु बिहार के अलावा बंगाल, असम, उड़ीसा, जम्मू कश्मीर, मणिपुर और मध्य प्रदेश में भी इसकी खेती की जाती है। हालांकि व्यवसायिक स्तर पर इसकी खेती अभी सिर्फ बिहार में ही की जा रही है। लेकिन केन्द्र सरकार अब बिहार के साथ ही देश के अन्य बाकी राज्यों में भी इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है।

मखाने का उत्पादन
मखाने का उत्पादन

यहाँ यह बताते चले कि मखाना की खपत देश के साथ ही अंतरराष्टीय बाजारों में भी है। भारत के अलावा चीन, जापान, कोरिया और रूस में मखाना की खेती की जाती है। बात करे भारत की तो हमारे देश में बिहार के दरभंगा और मधुबनी में मखाने की खेती सबसे ज्यादा की जाती है।

मखाने की खेती के लिए उपयुक्त माहौल-

बढ़ती आबादी और घटती तालाबों और तालों की संख्या के बाद मखाना अनुसंधान संस्थान दरभंगा के कृषि वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसमें अब खेतों में भी मखाना की खेती हो सकेगी। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल, तराई और मध्य यूपी के कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पर खेतों में साल भर जल जमाव रहता है। ऐसे में इन खेतों में मखाना की खेती करके किसान आर्थिक रूप से समृद्ध हो सकते हैं। आइये जानते है क्या होनी चाहिए उपयुक्त दशाएं जो मखाने के खेती के लिए उपयुक्त मानी जाए|

मखाने के लिए खेत
मखाने के लिए खेत

मखाने की खेती के लिए ज्यादातर तालाबों या तालों का इस्तेमाल किया जाता है| अभाव में खेत में भी किया जा सकता है जिसके लिए खेत में 6 से लेकर 9 इंच तक पानी जमा होने की व्यवस्था करनी होती हैं | आप चाहे तो खुद से भी एक तालाब तैयार कर मखाने की बीज उसमे रूप सकते हैं| बीजरोपण से पहले तालाब के पानी से खर-पतवार निकाल ले|  यदि आप बिहार से है तो कुछ इलाकों में आपको कुछ समय के लिए खेती करने के लिए तालाब किराये पर मिल जाएगी|

फसल एकत्रण कैसे करे?

  • अप्रैल के महीने में पौधों में फूल लगते हैं। फूल पौधों पर 3-4 दिन तक टिके रहते हैं। और इस बीच पौधों में बीज बनते रहते हैं ।
  • 1-2 महीनों में बीज फलों में बदलने लगते हैं। फल जून-जुलाई में 24 से 48 घंटे तक पानी की सतह पर तैरते हैं और फिर नीचे जा बैठते हैं।
  • मखाने के फल कांटेदार होते है। 1-2 महीने का समय कांटो को गलने में लग जाता है, सितंबर-अक्टूबर महीने में पानी की निचली सतह से किसान उन्हें इकट्ठा करते हैं, फिर उन की प्रोसेसिंग का काम शुरू किया जाता है।
  • फिर उसके बाद सूरज की धूप में बीजों को सुखाया जाता है। बीजों के आकार के आधार पर उन की ग्रेडिंग की जाती है। उन्हें फोड़ा और उबाला जाता है फिर भून कर तरह-तरह के पकवान एवं खाने की चीजे तैयार की जाती है ।

मखाना उत्पादन की समस्याएं

  • मखाना का फल कांटेदार एवं छिलकों से घिरा होता है, जिससे की इसको निकालने एवं उत्पादन में और भी कठिनाई होती है। यह बताते चले कि पानी से मखाना निकालने में लगभग 25 फीसदी मखाना छूट जाता है और 25 फीसदी मखाना छिलका उतारते समय खराब हो जाता है
  • ज्यादातर मामलों में मखाने की खेती पानी में की जाती है, ऐसे में पानी से निकालने में किसानों को तरह-तरह के समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ज्यादा गहराई वाले तालाबों से तो मखाना निकालने वाले श्रमिकों का डूबने का डर भी बना रहता है।
  • सिमित सुरक्षा से सुसज्जित किसान को पानी में रहने वाले जीवों से भी काफी खतरा रहता है | जल में कई ऐसे विषाणु भी होते हैं, जो गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते हैं।
  • अभी तक किसानो को ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं मुहैया करवा पाने के वजह से बगैर सांस लिए अधिक से अधिक 2 मिनट तक भीतर रहा जा सकता है। ऐसे में फसल एकत्र करने के लिए बारबार गोता लगाना पड़ता है जिससे समय, शक्ति और मजदूरी पर अधिक पैसा खर्च होता है।

अपना मखाना कहा बेचे? 

आप चाहे तो मखाने को सीधा अपने बाजार में लोकल कस्टमर के बीच उतार सकते है| आप इसे रिटेल भी कर सकते हैं  एवं बेहतर डील मिलने पर व्होलसेल की दर पे भी बेच सकते हैं | इसके कई व्यापारी आपको एडवांस तक देते हैं |ये एक नकद बिकने वाली फसल है तथा देश से लेकर विदेश तक इसकी मांग लगातार भी बढ़ रही है |ऑनलाइन के इस जग में आप चाहे तो अपने मखाने की पैकेजिंग कर फ्लिपकार्ट, अमेज़न इत्यादि साइट पर भी बेच सकते है|

आशा करते है मखाने की खेती से जुडी यह लेख आपको पसंद आयी होगी| अपने किसान भाईयों को जागरूक कर स्वरोज़गार मुहैया कराने हेतु शुरुवात की गयी इस मुहीम से जुड़े रहने के लिए हमें सब्सक्राइब करना न भूले| इसी तरह की जानकारी पाने के लिए बेबाक किसान कनेक्शन को अपना सहयोग दे| मखाने के उत्पादन से जुड़ी किसी भी तरह के समस्याओं के समाधान हेतु नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट करना न भूले|

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