‘जीना मरना’ फ़िल्म ‘दो लफ्जों की कहानी’ से लिरिक्स एंड गाने : जीना मरना अल्तमश फरीदी  द्वारा गाए इस गाने को कंपोज़ किया है बबली हक ने जबकि सगीत लिखा है संदीप नाथ ने |

गायक :  अल्तमश फरीदी
संगीत:   संदीप नाथ
बोल:     बबली हक
रिलीज़ कम्पनी : टी सीरीज

[youtube https://www.youtube.com/watch?v=NL7RQvixfUs]

क्यूँ इतनो में तुझको ही चुनता हूँ हर पल
क्यूँ तेरे ही ख्वाब अब बुनता हूँ हर पल
क्यूँ इतनो में तुझको ही चुनता हूँ हर पल
तेरे ही ख्वाब अब बुनता हूँ हर पल

तूने मुझे जीने का हुनर दिया
ख़ामोशी से सहने का सबर दिया
तू ही भरोसा ज़िंदगी का
तू है मेरा होंसला
मुझे जीना सिखा दिया
मरना सिखा दिया
तेरी वफाओं ने तुमसा बना दिया

जीना सिखा दिया
मरना सिखा दिया
तेरी वफाओं ने तुमसा बना दिया

जीना सिखा दिया
मरना सिखा दिया
तेरी वफाओं ने तुमसा बना दिया

तेरे ख्यालों में हो गयी गुम
ये मेरी तन्हैयाँ
अब रूह मेरी करने लगी है
तेरी निगेह्बानियाँ (2)

तू ही भरोसा ज़िन्दगी का
तू ही मेरे होंसला
मुझे जीना सिखा दिया
मरना सिखा दिया
तेरी वफाओं ने तुमसा बना दिया

जीना सिखा दिया
मरना सिखा दिया
तेरी वफाओं ने तुमसा बना दिया

बंधने लगे हैं रिश्तों के धागे
तेरे मेरे दरमियान
थोड़े सुकून में रहने लगी हैं
ये मेरी बेचैनियाँ (2)

तू ही भरोसा ज़िन्दगी का
तू है मेरे होंसला
मुझे जीना सिखा दिया
मरना सिखा दिया
तेरी वफाओं ने तुमसा बना दिया

जीना सिखा दिया
मरना सिखा दिया
तेरी वफाओं ने तुमसा बना दिया

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‘जीना मरना’ फ़िल्म ‘दो लफ्जों की कहानी’ से लिरिक्स एंड गाने
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