‘जुनूनियत’ फ़िल्म ‘जुनूनियत’ से लिरिक्स एंड गाने: जुनूनियत फलक शबीर  द्वारा गाए इस गाने को कंपोज़ किया है मीत ब्रोस, अन्ज्जन ने जबकि सगीत लिखा है कुमार  ने |

गायक :  फलक शबीर 
संगीत:   मीत ब्रोस, अन्ज्जन
बोल:    कुमार 
रिलीज़ कम्पनी : टी सीरीज


पलकें जीए कैसे आँखों बिना
मुमकिन है क्या ये ओ मेरे खुदा
क्यूँ सांस लूं बस यूँ ही बेवजह
रिहा कर मुझे मेरे दर्दों से ज़रा

दिल जो इबादत करे इश्क की
तोह मार्के भी जिंदा रहे आशिकुई

जुनूनियत है येही (10)

तू नहीं तोह लग रहे हैं
रात जैसे दिन
आँखों के है मौसम है भीगे
आज तेरे बिन

तू जुदा तोह रुक गयी है सांसें कहीं
आँखों से बिछड़ी लकीरें कह रही बस येही

दिल जो इबादत करे इश्क की
तोह मार्के भी जिंदा रहे आशिकुई

जुनूनियत है येही(10)

याद तेरी मिल रही है
मुझको हर इक मोड़ पे
दिल को धड़कन धीरे धीरे
जा रही है छोड़ के

तुझको फिर से कर लूं हासिल
है ये ख्वाहिश आखिरी
ना मिले तोह मैं खुदा की
छोड़ दूंगा बंदगी

दिल जो इबादत करे इश्क की
तोह मार्के भी जिंदा रहे आशिकुई

जुनूनियत है येही (10)

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‘जुनूनियत’ फ़िल्म ‘जुनूनियत’ से लिरिक्स एंड गाने
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