स्कूल फ़ीस बढ़ोतरी : सोमवार 23 जनवरी को आये फैसले ने पुरे देश में शिक्षा के क्षेत्र को नया मोड़ दिया. दिल्ली सरकार पिछले एक साल से इस केस को लड़ रही थी. दिल्ली में 400 से ज्यादा प्राइवेट स्कूल हैं जो सरकार द्वारा प्रदान सरकारी जमीन पर स्थित है. प्राइवेट स्कूल हर साल अलग-अलग तरीके से फीस बढ़ाते रहते हैं. जिसके खिलाफ़ आम आदमी पार्टी की सरकार ने हाईकोर्ट का दरबाजा खटखटायाथा. जिसमे कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि स्कूल मनमाने तरीके से फ़ीस नहीं बढ़ा सकते. फ़ीस बढ़ाने से पहले दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग से अनुमति लेनी पड़ेगी.

यहाँ आपको बता दे कि ये वे स्कूल है, जिन्होंने सरकारसे जमीन सस्ते कीमतों पर या तो ख़रीदी है या लीज पर ली है. सरकार ने जमीं देने वक़्त नियम तय किये थे जिनमे एक शर्त यह भी थी कि ये स्कूल बिना सरकार के शिक्षा विभाग के अनुमति के बिना अपनी ट्यूशन फ़ीस नहीं बढाएँगे. ये प्राइवेट स्कूल हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट गए, जहाँ इनकी अपील ख़ारिज हो गई.

यह फ़ैसला भले ही दिल्ली के लिए हो लेकिन इसका असर देश के अन्य राज्यों में भी पड़ने वाला है. जैसा की हम जानते हैं कि सभी राज्यों में सेकड़ो ऐसे शिक्षण संस्थान हैं जो सरकारी जमीन से संचालित हो रहे हैं. देश भर के लाखों छात्र और अभिभावकों के लिए यह एक अच्छी ख़बर है.

क्या इस निर्णय से स्कूलों के बेहतरी में रुकावटे आएंगी :

जानकारों की माने तो इस निर्णय से दूरगामी नतीजे भी अच्छे ही हों, यह जरुरी नहीं.

इन तथ्यों पर नज़र डालें :

मुद्रास्फीति के साथ-साथ ही स्कूलों के खर्च बढ़ने नहीं रुक जाएँगे.

स्कूल के विकास के लिए ली जाने वाली फीस स्कूल में हो रहे चहुमुखी विकास में योगदान करता है.

फ़ीस के माध्यम से स्कूलों में नई-नई तकनीक लगाई जाती है.

प्राइवेट स्कूल नई तकनीक को अपनाने में सरकारी स्कूल से आगे रहती है इसका कारण निजी स्कूल की वित्तीय स्थिति मजबूत होना.

इसे भी पढ़ें : क्या है Maternity Benefit Bill ? जाने बिल से जुड़े अपने अधिकारों को

अभी भी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्णबदलाव करना बहुत ही जरुरी है नये-नये नियम बनते हैं जिनका व्यापक असर भी देखने को मिलता है. आपको याद होगा तमिलनाडु सरकार द्वारा संचालित मिड-डे मील देश भर के राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लागु किया.

जरुरी है कि शिक्षा ही नहीं  और भी कई महत्वपूर्ण क्षेत्र – चिकित्सा, व्यापार इत्यादि के उपर भी समय-समय पर बदलाव होते रहे.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here