पहले तो नोट कीजिये कि अपने राम मानते हैं कि यह देश का ‘मोदी युग’ है ।
बिना किसी किंतु परंतु, अगर मगर, आदि इत्यादि के स्वीकार करना होगा कि आज की सियासत का कोई आख्यान नरेंद्र मोदी के उल्लेख के बिना कहा-सुना, पढ़ा-लिखा नहीं जा सकता।

2014 में नरेंद्र मोदी को बागडोर सौंप कर देश ने कोई गलती नहीं की थी। लेकिन सत्ता के सिंहासन पर बैठने के बाद मोदी सर से गलती हो गयी है…वे देश को वैसा समझ बैठे हैं हैं जैसे वे ख़ुद हैं…।

अब आज की हक़ीकत भी नोट कर लीजिये…

हक़ीक़त ये है कि नरेंद्र मोदी नाम का तिलिस्म टूट कर बिखर चुका है….2013 – 2014 में सोशल मीडिया और टू-D, थ्री D के जरिये गढ़ी गयी उनकी भीमकाय छवि एक ‘लिलीपुट’ साबित होने की तरफ है।

हिंदी हार्टलैंड के चुनावी नतीजे बता रहे हैं कि मतदाता माईबाप ने ‘हाथ’ के बारीक ‘फनर’ से नरेंद्र मोदी की ‘माइटी हिमालयन मेन ‘ की मूरत को महज पांच फुट सात इंच के भुरभुरे पुतले में बदल दिया है।
राहुल गांधी नाम के सहज साधारण मनुष्य ने नरेंद्र मोदी नाम के देवता, और अवतार के माथे पर से मोर मुकुट और आभूषण उतार कर समस्त आभा मण्डल को धूल धूसरित कर दिया है।

सॉरी मोदी सर…आप इस देश को और समाज को गलत समझ बैठे… नहीं सर…ये देश वैसा बिल्कुल नहीं है जैसा आप समझ बैठे हैं…यह कभी भी उतना ‘नीचे ‘ नही उतर सकता जितना आप उतर आये हैं…! नरेंद्र मोदी देश के इतिहास के पहले ऐसे महानायक हैं जिनकी छवि का इतना ‘शीघ्रपतन’ हुआ है।

आइये सर आपको बहुत थोड़ी सी बातें याद दिलाते हैं।
थोड़ा कहा बहुत समझियेगा सर…!

● बेटी के ब्याह में पैसा नहीं था और आप खुश थे…

मोदी सर…आपने नोटबन्दी के बाद जापान में एक भाषण में हाथ नचा नचा कर कहा था कि ” घर में बेटी की शादी है…नोटबन्दी के कारण पैसे नही हैं…” उस वक्त आप हाथ नचा कर दोनों अंगूठे घुमा कर किसका अपमान कर रहे थे सर..?
आप तो देश के अभिभावक हैं न सर…एक भी भारत वासी की बिटिया का ब्याह अगर पैसे के टोटे से रुका होगा तो उस पर क्या बीती होगी…?
ख़ैर आप नहीं समझेंगे सर..! समझ भी कैसे सकते हैं ..!

● भारत में जन्म लेने पर कोई शर्मिंदा नहीं था…

मोदी सर..याद है न आपने किसी दूसरे देश की धरती पर कहा था कि “लोग 2014 से पहले भारत मे जन्म लेने पर शर्मिंदा होते थे..।”
सर आपको किसने बताया था कि ऐसा होता था..? 2014 से पहले भी हमें भारत मे जन्म लेने पर गर्व था ,है और रहेगा।
हां… हमारे देश का मुखिया विदेशी धरती पर ऐसा निर्लज्ज बयान दे रहा है इसे जानकर जरूर शर्मिंदा हुआ था देश।

● कांग्रेस नहीं विधवा तो हर घर में है…

सर…आपने राजस्थान में किसी पेंशन घोटाले की बात कही।
आपने कहा कि “पैसा कांग्रेस की विधवा के खाते में जाता था…”।
पहली बात अगर आपको पता है कि कांग्रेस की विधवा के खाते में बेजा तरीके से पैसा जाता था तो आपने अब तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं की..? अब तक वो विधवा जेल में क्यों नहीं है..?
दूसरी बात…सर विधवा होना कोई अपराध है क्या..? इन पंक्तियों के लेखक की माँ ने दशकों तक वैधव्य का जीवन जिया लेकिन पूरी गरिमा के साथ.. !
सर आपकी परम पूजनीय मातुश्री भी विधवा हैं …! उनके श्रीचरणों में नमन।
लेकिन क्या विधवा या विधुर होना किसी भी तरह से अपमान का पात्र होना है..?
आप कांग्रेस की जिस विधवा की ओर संकेत कर रहे थे वह देश की एक शहीद पूर्व प्रधानमंत्री की बहू और एक शहीद पूर्व प्रधानमंत्री की पत्नी भी है। क्या उसका अपमान कर आप देश की समस्त स्त्री शक्ति का अपमान नहीं कर रहे थे…?

● बेटे की मौत का ग़म कोई बाप नहीं भूलता सर..

आपने अभी कुछ दिन पहले कहा था कि नोटबन्दी में जान गंवाने वाले जवान बेटे का बाप भी साल भर में इस ग़म को भूल गया है लेकिन कांग्रेस इस ग़म को नहीं भूल रही..!
सर हमें कांग्रेस से कोई लेना देना नहीं है। लेकिन न ये देश नोटबन्दी की आफत को भूला है और न वो बाप जिसका जवान बेटा इस त्रासदी की भेंट चढ़ गया।
सर… कोई बाप अपने जवान बेटे की मौत का ग़म आखिरी सांस तक न भूलता है और न ही भूल सकता।
याद है सर…’शोले’ में मौलावी साहब अपने जवान बेटे का जनाज़ा उठते वक्त क्या कहते हैं…!
कहते हैं— “दुनिया का सबसे बड़ा बोझ होता है बाप के कंधे पर बेटे का जनाज़ा…!”
और आप कहते हैं कि बाप अपने बेटे की मौत का ग़म भूल गया है….!
ख़ैर.. आप नहीं समझेंगे…! समझ भी कैसे सकते हैं..!

● वोटों से आपकी झोली भर दी बदले में मिला क्या…?

नरेंद्र मोदी सर…आप भ्रष्टाचार के विरुद्ध दुंदुभी बजा कर रणभूमि में उतरे थे… उम्मीदों के ऐसे तूमार आपने बांधे थे कि मतदाता माईबाप ने आपको झोली भर भर वोट दे दिये…!
और बदले में आपने क्या दिया…?
नोटबन्दी जैसा इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला…! बहुत लंबी फेहरिस्त है घोटालों की…नामचार के लिए राफेल ही काफी है..!
बैंकों को तबाह कर चंपत होते धन्नासेठ…!
संवैधानिक संस्थाओं की कुत्ताघसीटी…!
धार्मिक और जातीय विद्वेष….!

● नेहरू गांधी को कब तक कोसेंगे सर…

जंगे आज़ादी में एक दशक से ज्यादा अंग्रजों की जेल में रहे और 17 बरस देश के प्रधानमंत्री रहे जवाहरलाल नेहरू को दुनिया ए फानी से रुखसत हुये पचपन बरस हो चले हैं मोदी सर…।
वे अपने युग के विश्वनायक थे।
आप आज भी अहर्निश उन्हें कोसते रहते हैं…ऐसा शायद ही कोई चुनावी दिन गुजरता है जब आप उन पर अपने कमल सरोवर की कीच न उछालते हों…!
अच्छा सर…मान लेते हैं नेहरू गलत आदमी थे..कुछ नहीं किया उन्होंने देश के लिए…..!
तो…अब बताइये क्या किया जाये…?
स्वर्ग से उतार कर लायें उन्हें…और इस्तीफ़ा धरा लें उनका….!
बताइये..आप ही बताइये…क्या करें…?

सर आप तो ख़ुद को हिन्दू हृदय सम्राट समझते हैं न…!
तो बताइये आप जो कुछ बोल रहे हैं…कर रहे हैं…वो किस हिन्दू परंपरा और संस्कार में आता है…?

अच्छा छोड़िये ये सब…

हम आपको बताये देते हैं कि जिस दौर में आपके चारण और भाट आपको विष्णु का ग्यारहवां अवतार घोषित कर रहे हैं…
ईश्वर का वरदान बता रहे हैं…गाँधी, गौतम से तुलना कर रहे हैं.. ठीक उन्हीं दिनों में लाखों लोगों ने टीवी पर आपको देखकर चैनल बदलना शुरू कर दिया है…।
(आपको तो याद होगा न…जब इंदिरा को इंडिया कहा जाने लगा था तब उन्हें भी जनता ने धरती पर उतार दिया था सर)
हम सचमुच अपने महादेश के प्रधानमंत्री का सम्मान करना चाहते हैं…हम सचमुच आप पर, उस ओहदे पर बैठे व्यक्ति विशेष पर गर्व करना चाहते हैं लेकिन आप मौका ही नहीं दे रहे सर..!

ख़ैर… अगर ख़ुद आपने मणिशंकर अय्यर के कहे को सही ठहराने का ‘ठीका’ उठा लिया है तो यह देश कर भी क्या सकता है..! 😢

बस इतना ही कर सकता है कि वक्त बेवक्त आपको आवाज़ देता रहे कि…नहीं सर हम वैसे नहीं हैं जैसा आपने हमें समझ लिया है…आप देश को समझने में भूल कर रहे हैं…!
हम और हमारा देश कभी उस ‘स्तर’ तक नहीं उतरे जिस पर आप उतर आए हैं…!
याद रखिये उस स्तर पर कभी उतरेंगे भी नहीं।

शेष शुभ है।

लेखक के बारे में: राकेश जी DNN न्यूज़ चैनल, भोपाल में प्रधान संपादक हैं।

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