मुजफ्फरपुर (बिहार) का लीची उत्पाद के मामले में सबसे अवल स्थान सदियों से रहा है लेकिन लीची में पाए जाने वाले टोक्सिन मुजफ्फरपुर के बच्चो में Acute Encephalitis Syndrome (AES) नाम के बीमारी को आमंत्रण दे रहा है |

वेल्लोर (तमिलनाडु) के डॉक्टर टी. जैकब जॉन ने एक रिपोर्ट मे उक्त बातों का जिक्र किया है ज्ञात हो इस से पहले भी अमेरिका के संस्थान सेंटर फॉर डिजीज कण्ट्रोल (CDC) ने अपने एक रिपोर्ट में कहा था “जमैकन लीची में एक ऐसा टोक्सिन पाया जाता है जिस से Acute Encephalitis Syndrome (AES) नाम की बीमारी अफ्रीकन देशों में लगातार बढ़ रहा है |”

डॉ जॉन और अरुण शाह दोनों इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टॉक्सिकोलॉजी, लखनऊ में इन तथ्यों पर रिसर्च कर रहे हैं | उक्त बातें तब सामने आई जब इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस, बैंगलोर के जर्नल कर्रेंट साइंस में छपी इस खबर को टाइम्स ऑफ़ इंडिया देश पब्लिश किया |

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने ईमेल के जरिये डॉ जॉन से इस बारे में जब जानकारी मांगी तो उन्होंने बताया “2013 के ही CDC रिसर्च में ये बात सामने आई थी की लीची में एक ऐसा टोक्सिन पाया जाता है जिस से Hypoglycaemia हो जाता है सरल भाषा में शरीर में सुगर लेवल कम हो जाना” आगे डॉ जॉन ने लिखा “हमारे शोध में यह भी साबित हुआ है की पके लीची के साथ साथ आधे पके लीची में भी Mythylene Cyclopropyl-glycine (MCPG) नाम के टोक्सिन पाए जातें हैं जिस से Hypoglycaemia बच्चो में होता है और मौत भी हो सकती है |”

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