History of Govind dev ji Temple Vrindavan in Hindi: अबुल मुज़फ्फर मुहीउद्दीन मुहम्मद औरंगजेब आलमगीर उर्फ़ औरंगजेब..मुग़ल बादशाह शाहजहाँ का पुत्र जिसने राजगद्दी के लिए अपने सारे भाइयो को मरवा डाला| यहाँ तक की अपने नीतियों का विरोध किये जाने पर अपने पिता शाहजहाँ को भी उम्र कैद की सजा दे डाली| भारतीय इतिहास में मुग़ल शाशक औरंगजेब की गिनती उन चंद शाशकों में की जाती हैं जिसके तलवार के धार के आगे शायद पूरा भारत नतमस्तक था| परन्तु क्या आपको पता हैं  कि औरंगजेब जितना बहादुर था उससे कही ज्यादा क्रूर भी| गैर इस्लामी लोगो के प्रति उनकी हिंसा जगजाहिर थी| यहाँ तक की उन्होंने अपने साम्राज्य में यह फरमान निकाल दिया था कि यदि जीवित रहना हैं तो इस्लाम को कबुल करना ही परेगा|

अपने शाशन काल में उन्होंने कई धर्म गुरुओं को मौत के घाट उतार दिया साथ ही अनेकों मंदिर एवं तीर्थ स्थलों को तुडवा वहां मस्जिदे बना दी गयी| औरंगजेब जहाँ-जहाँ गया, वहां इस्लाम का पताका लहराता गया एवं पीछे रह गए तो बस अवशेष| कभी जहाँ पर हिन्दू एवं अन्य धरम संस्कृति सर चढ़ कर कलाकृतिया करती थी वो आज औरंगजेब के जुल्मों सितम के वजह से खंडहर समान हो गयी हैं| ऐसी ही एक मंदिर वृन्दावन में भी हैं- गोविन्द जी मंदिर|

History of Govind dev ji Temple Vrindavan
Govind Dev Ji Mandir
Govind Dev Ji Mandir

वृन्दावन में यूँ तो हजारों मंदिरे हैं जिसे देखने के लिए शायद एक महीने का भी समय काफी कम पर जाये परन्तु उन मंदिरों में गोविन्द जी मंदिर की गणना बड़े शान से की जाती हैं| कभी राजपूत शैली में बनी इस 7 तल्ला विशाल मंदिर की रौनक इतनी तेज़ होती थी की इसका प्रकाश दूर मथुरा से भी दिखाए देती थी| ऐसे में एक बार औरंगजेब दिल्ली से मथुरा होकर आगरा जा रहे थे तभी दूर आकाश में उन्हें प्रकाश का एक बड़ा सा स्रोत दिखाई दिया| लोगो से तहकीकात करने पर यह पता चला की वहां कोई प्राचीन हिन्दू मंदिर हैं जिसके ऊपर जल रहे दिये की रौशनी के वजह से ऐसा समां बंधा हैं|

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फिर क्या उन्होंने आव देखा न ताव एवं अपने सैनिकों को मंदिर को नेस्तनाबूद करने का फरमान दे डाला| आखिर गैर इस्लामी काफिरों की शानो-शौकत हमसे ज्यादा हो ये हम कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं| सैनिकों ने मंदिर को तोपो से उड़ाना चाहा एवं देखते ही देखते ऊपर के सारे माले तोड़ दिए गए| मुख्य पुरोहित जान बचने के लिए अपने साथ गोविन्द जी (श्री कृष्ण) की प्रतिमा ले वहा से जयपुर चले गए|  तभी वहाँ कुछ चमत्कार होता हैं एवं एक ही साथ ढेर सारे बन्दर उस मंदिर की रक्षा करने के लिए चले आते हैं|

History of Govind dev ji Temple Vrindavan

बंदरो के आतंक से सारे सैनिक उस स्थान से जान बचाकर भाग जाते हैं परन्तु तब तक काफी देर हो चुकी होती हैं| कुछ देर पहले तक राजपूतो की शान का बखान करती यह मंदिर औरंगजेब की क्रूरता के वजह से एक खंडहर में तब्दील हो जाती हैं| आज भी सैकड़ो बन्दर आपको मंदिर के प्रांगन में आराम से घूमते हुए दिख जायेंगें| खैर जो भी हुआ उसे हम अच्छा तो नहीं कह सकते परन्तु जितना भी शेष बचा हैं उसकी सुन्दरता आपको थोडा सुकून जरुर पहुंचाएगी| अगली बार जब भी आप वृन्दावन जाये तो इस प्राचीन धरोहर को देखना न भूले|

डिस्क्लेमर( स्पष्टीकरण): ध्यान दे गोविन्द जी मंदिर के प्राचीन इतिहास की कहानी (History of Govind dev ji Temple Vrindavan) वहां के मुख्य पुरोहितों एवं आस-पास बसे लोगों द्वारा सुनाई गयी हैं| इस कहानी के प्रमाणिकता एवं सत्यता के प्रति ट्रेंडिंगऑवर परिवार किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं हैं| रीडर्स से अनुरोध हैं कि वे इस लेख को पढ़ते वक़्त कृपया अपने विवेक से काम ले|

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