नवजोत सिंह सिद्धू के पीछे तथाकथित राष्ट्रवादी पीछे पड़ गए लेकिन सचाई क्या है ?

नवजोत सिंह सिद्धू
नवजोत सिंह सिद्धू

पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू अक्सर सुर्खियों में रहते हैं लेकिन आजकल वो पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद दिए गए अपने बयान के बाद लोगों के निशाने पर हैं. बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी सिद्धू टेलीविजन इंडस्ट्री के अलावे भारत के प्रमुख राजनीतिक हस्ती हैं. पुलवामा घटना के बाद उनके बयान के बाद देशभर में हंगामा मचा है. लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. कुछ विरोध कर रहे हैं तो कुछ लोग उनका बचाव भी कर रहे हैं.

दरअसल, बीते 14 फरवरी को जम्मू से श्रीनगर ले जा रहे 2500 सीआरपीएफ के जवानों पर आतंकियों ने हमला कर दिया. जवानों को ले जा रही 78 गाड़ियों के काफिले पर विस्फोटक सामग्री से लदी कार बायीं ओर से ओवरटेक करते हुए टक्कर मार दी जिसमें 40 जवान शहीद हो गये.  इस घटना के बाद देशभर में गुस्से का माहौल है. पाकिस्तान के खिलाफ तरह-तरह की प्रतिक्रियाओं पर सिद्धू ने कहा कि, “कुछ लोगों के लिए क्या आप पूरे देश को जिम्मेदार ठहरा सकते हैं?”
आतंकी हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व क्रिकेटर ने कहा कि, “यह कायरतापूर्ण कार्रवाई है और मैं सख्ती से इसकी निंदा करता हूँ. हिंसा हमेशा निन्दनीय है और जिनलोगों ने यह किया है, उन्हें सजा मिलनी चाहिए.”

आतंकी हमले के बाद गुस्से से उबल रहा देश इस घटना के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार मानता है वहीं एक तबका “तथाकथित राष्ट्रवादियों” का है जिसने सिद्धू के बयान को निशाने पर लिया है. वे सिद्धू को देशद्रोही, पाकिस्तान प्रेमी साबित करने में लगे हैं. अपने बयान के बाद विरोध का सामना कर रहे सिद्धू ने दुहराया कि, “मैं अपने बयान पर कायम हूँ तथा मैं पूछना चाहता हूँ कि पुलवामा मामले की जिसने जिम्मेदारी ली है उसकी बेड़ियां खोलने वाले कौन थे? हमारे एक भी सैनिक शहीद क्यों हो? आतंकी हमले रोकने के लिए स्थाई समाधान क्यों नहीं किया जाता? आतंकवाद बर्दाश्त नहीं, दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिये.

सिद्धू के बयान के बाद से उनका विरोध लगातार जारी है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, “द कपिल शर्मा शो” से उन्हें निकाल दिया गया है. फ़िल्म सिटी में प्रवेश पर प्रतिबंध व कांग्रेस से निकाले जाने की मांग भी हो रही है. सोशल मीडिया पर उनके बहिष्कार के लिए कैम्पेन किया जा रहा है. सिद्धू के बचाव में आये कपिल शर्मा ने कहा कि, “किसी को निकालना समस्या का समाधान नहीं.” उन्होंने युवाओं से अपील किया कि “आप मुद्दों से डायवर्ट न हों, स्थाई समाधान ढूंढने की कोशिश करें.” इसके बाद कपिल शर्मा भी सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गए. लोगों ने उनके  कॉमेडी शो को बायकॉट करने की धमकी तक दे डाली.

पुलवामा आतंकी हमले के बाद घटना के कारणों, दोषियों को सजा दिलाने से कहीं ज्यादा सिद्धू का बयान चर्चा में रहा. सिद्धू को देशद्रोही साबित करने की कोशिश होती रही. लोगों ने उन्हें पाकिस्तान प्रेमी तक कह डाला.

अब सवाल है कि क्या अपने बयान से सिद्धू देशद्रोही, पाकिस्तान प्रेमी साबित होते हैं? एक सामान्य  नागरिक की नज़र से देखिये तो कहीं से भी ऐसा नहीं लग रहा कि उनका बयान देशविरोधी है. किसी से व्यक्तिगत सम्बन्ध को लेकर उनका व्यवहार जो भी रहा हो पर राष्ट्र के स्तर पर वो राष्ट्रीय एकता, आतंकवाद के खिलाफ हुंकार भरते रहे हैं.

दरअसल, “तथाकथित राष्ट्रवादियों” ने उनके विरोध का जो आधार बनाया है वो उनका “पाकिस्तान कनेक्शन” है. पिछले साल पूर्व क्रिकेटर व पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने समकालीन क्रिकेटर दोस्त नवजोत सिंह सिद्धू को अपने शपथ ग्रहण समारोह में आने का निमंत्रण दिया. शपथ ग्रहण समारोह में सिद्धू की उपस्थिति में जो चर्चा का विषय रहा वो है–पाकिस्तान के सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा से सिद्धू का गले मिलना और पाक अधिकृत कश्मीर(PoK) के राष्ट्रपति के बगल में उनके बैठने की सीट. बीजेपी व उसके समर्थको ने इसे मुद्दा बनाया. सिद्धू को देशविरोधी, पाकिस्तान प्रेमी कहा. कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने तो उन्हें गद्दार तक कह डाला. सिद्धू को देशद्रोही साबित करने की कोशिश में लगे लोगों को एक मौका और उस समय मिल गया जब वे शपथ ग्रहण के कुछ दिनों बाद करतारपुर कॉरिडोर के उदघाटन के लिए पाकिस्तान गये.


“फर्जी राष्ट्रवादियों” ने सिद्धू के इन दोनों कदमों को पाकिस्तान से जोड़कर प्रचारित किया. पुलवामा घटना के बाद जिस तरह से सिद्धू का विरोध हुआ, ऐसा लगता है जैसे ये पहले शख्स हैं जो पाकिस्तान गये हों, अहिंसा की बात की हो.?

लेकिन सवाल है कि क्या सिद्धू का “पाकिस्तान कनेक्शन” भारतीयों का एकमात्र कनेक्शन है? पूर्व में अटल बिहारी वाजपेयी की “मीनारे-पाकिस्तान” पर उपस्थित, आडवाणी का “जिन्ना मजार” और मोदी का बिन बुलाये नवाज शरीफ के घर जाना कौन-सा कनेक्शन है? कौन-सी राष्ट्रभक्ति है? पीलू मोदी-जुल्फिकार भुट्टो और दुलात-दुर्रानी के बीच की दोस्ती के भी खूब चर्चे रहे हैं.

पाकिस्तान को लेकर भारतीय आम जनमानस में सामूहिक चेतना के दो आयाम हैं. एक लॉबी है–सकारात्मक, नकारात्मक रूमानीकरण तथा दूसरी–यथार्थवादी, हकीकत पसंद व व्यवहारिक.

इन दोनों लॉबी के बीच एक तीसरी बीमारी भी फैल गयी है जो “फर्जी राष्ट्रवाद” के नाम पर उदण्डता, दुष्प्रचार करती है. लोगों में भ्रम, झूठ का ऐसा कारोबार करती है कि लोग वास्तविक मुद्दों से भटक कर “बनावटी” मुद्दों में खो जाते हैं. सिद्धू के बयान के बाद भी कुछ ऐसा ही हुआ. लोगों ने आतंकवादी घटना के पीछे के कारणों, सुरक्षा एजेंसियों की नाकामियों, सरकार के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार व दोषियों को सख्त सजा दिलाने की मांग को भूलकर सिद्धू को देशद्रोही व पाकिस्तान प्रेमी साबित करने में लगे रहे.!

विडीओ साभार: कनक न्यूज़

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