भारत में हर साल तम्बाकू एवं गुठका रहित पदार्थो से होने वाली टीबी रोग से लाखो लोगो की जान जा रही है | सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा उठाये गए अनुकूल कदम के बावजूद भी मरीजो की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है | अमूमन टीबी रोग के पहचान में मरीजो की नकारात्मकता एवं जाँच की एक प्रक्रियां काफी घातक सिद्ध होती है परन्तु सूत्रों की माने तो अब टीबी जैसे भयावह रोग के रोकथाम हेतु मात्र एक साधारण ब्लड टेस्ट के द्वारा ही शरीर में टीबी के संक्रमण के बारे में पता लगाया जा सकेगा |

एक रिपोर्ट के अनुसार अभी  माना जा रहा है कि दुनिया में लगभग एक तिहाई आबादी मिकोबक्टेरियम ट्यूबरक्लोसिस (MTB) नमक कीटाणु से संक्रमित हो सकते हैं | बताते चले की MTB के संक्रमण से ही टीबी होती है लेकिन अब शोधकर्ताओं ने कुछ ऐसे जैव संकेतको की पहचान की है, जिनकी मदद से डॉक्टर किसी व्यक्ति में सक्रिय ट्यूबरक्लोसिस विकसित होने के संभानाओ के बारे में पता लगाया जा सकेगा |

ज्ञात हो की की टीबी से संक्रमित आबादी के एक छोटे से हिस्से में ही इस बीमारी के लक्षण विकसित रूप से प्रकट होती है | ऐसे में रक्त में मौजूद जैव संकेतको के आधार पर टीबी की पहचान करने से इस बीमारी के जोखिम को ज्यादा से ज्यादा मात्रा में रोका जा सकेगा |

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